नदी एक बहुत ही सरल और उपयोगी शब्द है, जिसे हम रोज़ की ज़िंदगी में इस्तेमाल करते हैं। हिंदी भाषा में एक ही अर्थ को बताने के लिए कई पर्यायवाची शब्द (Synonyms) होते हैं। इस पोस्ट में हम जानेंगे नदी के पर्यायवाची शब्द (Nadi ka Paryayvachi Shabd), उनका अर्थ, और उन्हें वाक्य में कैसे प्रयोग किया जाता है।
भारत एक नदीयो का देश है – मतलब यहाँ पानी सिर्फ नल में नहीं, नदियों में भी आता है! बड़ी-बड़ी, छोटी-छोटी, टेढ़ी-मेढ़ी, – हर तरह की नदियाँ यहाँ बहती हैं।– मतलब, आप कह सकते हो की खेती से लेकर बिजली तक, और पीने से लेकर पूजा-पाठ तक, सब कुछ इन्हीं पर टिका हुआ है ।
अब बात करें “नदी” शब्द की – तो भाई ये हिंदी का VIP शब्द है! लेकिन जब आप बार-बार “नदी, नदी, नदी” बोलोगे, तो सुनने वाला बोलेगा, “और कुछ आता है क्या?” इसलिए हम लेकर आए हैं – नदी के पर्यायवाची शब्द(Nadi ka Paryayvachi Shabd) हाँ जी, ये वो शब्द हैं जो ‘नदी’ का काम भी करते हैं और सुनने में थोड़े स्टाइलिश लगते हैं।
तो इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे कि ‘नदी’ के कितने नाम होते हैं, कौन सा नाम कहाँ पर उपयोग कर सकते हो, और कैसे आप अपनी हिंदी को बना सकते हैं सुपरहिट! यह पोस्ट इतना आसान है कि इसे छोटे बच्चे से लेकर दादी तक पढ़ सकते हैं। और हाँ.
Nadi ka Paryayvachi Shabd : (नदी के पर्यायवाची शब्द)
- सरिता
- तटिनी
- तरंगिणी
- निर्झरिणी
- आपगा
- निम्नगा
- वाहिनी
- अपगा
- स्रोतस्विनी
- जलमाला
- नद
- प्रवाहिनी
- पयस्विनी
- कल्लोलिनी

Nadi ka Paryayvachi Shabd :नदी के पर्यायवाची शब्दों का अर्थ
- सरिता – यह भी जल की धारा को दर्शाता है, जिसे बहता हुआ पानी कहते हैं।
- धार – निरंतर बहने वाला जल।
- जलधारा – पानी की एक सतत बहाव।
- तटिनी – छोटी नदी या जलधारा।
- नद – नदी का संस्कृत रूप।
- प्रवाह – बहते हुए जल का संकेत करता है।
- तरंगिनी – लहरों वाली जलधारा।
- सिन्धु – पुरानी सभ्यताओं में एक विशाल नदी के लिए उपयोग होता था।
नदी के पर्यायवाची शब्दों का वाक्यों में प्रयोग
- सरिता – हिमालय से निकलने वाली सरिता मैदानों में जीवन देती है।
- धार – पहाड़ों से उतरती धार बहुत सुंदर लगती है।
- जलधारा – वह जलधारा अब भी गाँव के बीचोंबीच बहती है।
- तटिनी – वह तटिनी अब बच्चों का पसंदीदा खेल स्थान है।
- नद – वेदों में नद का वर्णन बहुत पवित्र रूप में हुआ है।
- तरंगिनी – तरंगिनी की लहरें मन को शांति देती हैं।
- प्रवाह – पानी का प्रवाह बहुत तेज था इसलिए हम आगे नहीं बढ़े।